जिला :- महासमुंद
विषय :- जीवन
शीर्षक :- जोगी के दोहे "जीवन"
विधा :- कविता
प्रायोगिक छंद :- दोहा
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अविनाशी जीवन नहीं, नाशवान ही जान।
मेहमान बनकर यहाँ, आया है इंसान।।
चार दिवस का है मिला, जीवन यह उपहार।
उर में सेवा भाव हो, पालो नहीं विकार।।
पतझड़ जो आए अगर, आएगी बरसात।
नव्य सवेरा से सुनो, छट जाएगी रात।।
जीवन की यह रीत है, जाने है संसार।
साथ सुखों के है मिले, दुख का भी अंबार।।
बुझ जाएगी एक दिन, जीवन जलती जोत।
जन्म हुआ तो हे सखा, होगी इक दिन मौत।।
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