जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-जहाज
विधा-कविता (मुक्त छंद)
द्रुतगति से उड़ते विमान
मानव की तरक्की के
मिशाल बन गये हैं।
समुद्र के जल पोत नव
इतिहास लिख रहे हैं,
विकास यात्रा की ।
पुष्पक विमान से वर्तमान
हवाई जहाज की यात्रा
तरक्की का सबूत है ।
पर संस्कृति और संस्कारों
की धरती क्यों बन रही
निर्जीव ताबूत है ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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