सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा- काव्य
विषय-जहाज
उड़ जाते हैं वेग से
आसमान में पंख पसारे
सात समंदर लांघ जाते हैं
पल भर में,पलक झपकाते
आकांक्षाओं की ऊंची उड़ान में
बादलों को चीर जाते हैं
पहुंच गंतव्य पर ही जहाज
थोड़ा आराम करते हैं
बचपन मे कभी कागज के
जहाज उड़ाया करते थे
तो कभी गली में बहती
पानी मे जहाज चलाया करते थे
दूर देशों में बसे अपनों से मिलाते
दिलों की और सीमाओं की दूरियों
को कम करने में जी जान लगाते
जन्नत के दर्शन कराते हैं जहाज
आवश्यकता बन चुकी है आज
जो कल तक सिर्फ ख्वाब था
जल और नभ में गर्जन करते
पंछियों सा हमें पंख दे जाते जहाज।।
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