Wednesday, April 14, 2021

संतराम कुम्हार की रचना-चेतिका

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
    विषय - चेतिका
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " चिंता, चिता का कारण है "
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कोरोना का कहर जारी है। 
खतरनाक ये महामारी है। 
परेशान ये दुनिया सारी है। 
लाॅकडाउन की फिर तैयारी है।। 

मरीज के कोई करीब नहीं। 
लाशों को चेतिका नसीब नहीं। 
कतार है लगी अंतिम सफर में भी, 
यहाँ कोई अमीर, न कोई गरीब नहीं।। 
कोरोना की दूसरी ये पारी है। 
मौत का तांडव अब तक जारी है।। 

चेतिका पर लेटी किसी का जहान। 
नहीं हो रही शवों का कोई सम्मान। 
दर्शन भी दुर्लभ परिजनों के, 
जल रही लाशें बिना श्मशान।। 
हे! ईश्वर, कैसी ये बीमारी है। 
नहीं पता कब किसकी बारी है।। 

चिंता को चीता का कारण न बनाओ। 
सकारात्मक ऊर्जा से डर को दूर भगाओ।
सामाजिक दूरी और पहनों मास्क, 
समय-समय पर सेनेटाइजर जरुर लगाओ।।
लापरवाही पड़ रही बहुत भारी है। 
डाॅक्टर, पुलिस कर रही रक्षा हमारी है।। 

साथ मिलकर हम सबको, कोरोना को हराना है। 
दूर रहकर एक-दूसरे से, महामारी को मिटाना है। 
रखो भरोसा खुदा पर सब,
दहशत में तो पूरा जमाना है।।
पंक्तियां जनहित में जारी है। 
घर में रहो विनती ये हमारी है।। 

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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