Wednesday, April 14, 2021

अमिताभ कुमार दीवान की रचना- चेतना

रचनाकार-अमिताभ कुमार दीवान
जिला-रायपुर
विषय-चेतिका
विधा-छंदमुक्त कविता


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जिंदगी जीने के लिए, पलाश ढूँढती है|
मौत की जिद है ,हजार लाश ढूँढती है| 

गलियों में आज ,इतनी वीरानी है क्यों,
मोहल्लों में घूमती हुई, काश ढूँढती है|

मैंने अपने दिल की, धड़कन से सुना तुम्हें,
इसलिए दिल  तुझमें ,सबसे खास ढूँढती है|

तेरी आँखों में आई है, उदासी की लकीरें,
मेरी आँखें उन आँखों में, आस ढूँढती है|

किताबों में सजती है, मुरझाए फूलों की चेतिका,
श्मशान तो जिंदा जिस्म उदास ढूँढती है|

अमिताभ कुमार दीवान 

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