Friday, April 16, 2021

डिजेन्द्र कुर्रे कृत संस्मरण- जहाज़

लेखक - डिजेन्द्र कुर्रे
जिला- बलौदाबाजार,छत्तीसगढ़
विषय - जहाज
विधा - आलेख
★★★★★★★★★★★★
     *जहाज यात्रा*
★★★★★★★★★★★★
रामेश्वरम धाम यात्रा का अविस्मरणीय पल 2018 में डिजेन्द्र कुर्रे, मनोज नीलम,अशोक टंडन,और धनंजय निराला चार साथी मिलकर यात्रा के लिए निकले।यात्रा की प्रारंभ लौहपथगामनी में बैठकर रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुए।गाड़ी की छुक-छुक की आवाज खिड़की के पास बैठकर दिखाई देती  प्रकति की अनमोल नजारें मनःपटल पर आज भी जीवन्त है।यात्रा की इस कड़ी में अनेक अनजान लोगो से बात कर मन बहुत ही प्रसन्न था।किसी पंछी की भांति पंख लगाकर कैसे उडती जा रही थी आभास ही नही हुआ।बीच बीच में मूंगफली और गरमा गरम भुना हुआ चना खाना यात्रा को और भी आंनददायक बना रहा था।समय कैसे व्यतीत हुआ पता ही नही चला।कभी गाना गाने के मन लगता तो हम सभी अंताक्षरी खेल लिया करते थे।हमारी लौहपथगामनी जब हजरतनिजामुद्दीन दिल्ली पहुँची।तब हम लोगो ने वहाँ कुछ विश्राम किया।फिर गाड़ी बदलकर दिल्ली से चेन्नई के लिए रवाना हुए।चेन्नई स्टेशन पहुँचने पर जिस किसी से भी बातें करना चाहा न तो हम उनकी बोली समझ पा रहे थे और न वे लोग हमारी बोली समझ पा रहे थे।बड़ी मुश्किल से एक हिंदी भाषी मिला।जिसे हिंदी का बहुत ही कम ज्ञान था।किसी तरह उनकी टूटी फूटी बोली को समझने लगे।जब उसने चलने को कहाँ तब हम सब मित्र डर रहे थे।कही यह व्यक्ति कोई चोर उचक्का नही हो।अंत में हम लोग एकमत होते हुए।हौसला करके उनके साथ हो लिए।उस व्यक्ति ने हमारे रहने के लिए होटल इन्तिजाम किया।और पूरे चेन्नई की सैर करायी।उस भले आदमी ने चेन्नई दर्शन करने के बाद हम जहाँ जहाँ यात्रा में जाते उनके आदमी लोग हमे लेने आ जाते।इसी तरह से मंगलमय यात्रा मदुरई केरल रामेश्वरम धाम की यात्रा पूरी हुई।यात्रा की इस कड़ी में रामेश्वरम धाम का दर्शन बहुत ही महत्वपूर्ण रहा।रामेश्वरम के चरण पखारने वाले सागर में कुछ दूर सैर करने के लिए मोटर वोट में सवार होकर सागर की लहरों को चीरते हुए सागर की गहराई नापने की कोशिश करने लगे।जो एक हम सबके लिए अविस्मरणीय पल था।तत्पश्चात  भूतपूर्व महामहिम डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम स्मारक का दर्शन करना बहुत ही सुखद अनुभूति रहा।स्मारक में आज भी उनके पोशाक,चप्पल,जूता एवँ उनकी किताबों को संजोकर रखा गया है।अंत में हमने भगवान तिरुपति बालाजी की विराट प्रतिमा की दर्शन कर तथा बाल विदान कर स्वयं को धन्य समझने लगे।सात दिनों की इस अनुपम यात्रा के बाद अब वापस जाने का समय हो चला था।मन में इस यात्रा की खट्टी मीठी यादें लिए गृह ग्राम वापस आए।
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★
लेखक - डिजेन्द्र कुर्रे(शिक्षक)
पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...