Monday, April 12, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- गवेजा

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-गवेजा
विधा-कविता (मुक्त छंद)

मानव तुझे नव जहान मिला है,
तुझे वाणी का वरदान मिला है ।

संवाद से  ही  मैत्री भाव पगा है,
मानवता का  एहसास जगा है ।

गवेजा से ही उलझन  सुलझे हैं,
गुत्थियों के सहीं हल  मिलते हैं ।

सुविचारों को नव कलेवर देना है,
संप्रेषण  का आधार भी गवेजा है।

 शब्दों को तोल कर संवाद करते,
 रिश्तों को साध -संजोकर रखते।

बातचीत विचारों की अभिव्यक्ति,
इसमें है असीम संजीवनी  शक्ति।

मीराआर्ची  चौहान
कांकेर,छग
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