जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-गवेजा
विधा-कविता (मुक्त छंद)
मानव तुझे नव जहान मिला है,
तुझे वाणी का वरदान मिला है ।
संवाद से ही मैत्री भाव पगा है,
मानवता का एहसास जगा है ।
गवेजा से ही उलझन सुलझे हैं,
गुत्थियों के सहीं हल मिलते हैं ।
सुविचारों को नव कलेवर देना है,
संप्रेषण का आधार भी गवेजा है।
शब्दों को तोल कर संवाद करते,
रिश्तों को साध -संजोकर रखते।
बातचीत विचारों की अभिव्यक्ति,
इसमें है असीम संजीवनी शक्ति।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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