Monday, April 12, 2021

संतराम कुम्हार की रचना- गवेजा

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
    विषय - गवेजा
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " पक्षी का बादल से बातचीत "
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तिनका तिनका जोड़कर मैंने,
ये आशियाना बनाया था। 
उजाड़ दी तुने, मेरे बुने इस महल को, 
चुन-चुन कर मैंने जिसे, 
दूर गली से लाया था।। 

कितने खुश थे मेरे बच्चे, 
कि उनका भी एक घर होगा। 
नादान थे, क्या पता उन्हें, 
बरसात के भेष में, 
कुदरत का कहर होगा।। 
भोजन की आस देकर, जिनको मैंने सुलाया था। 
गरज-गरज कर तुने ही तो, गहरी नींद उसे जगाया था।।

क्या करुं अब मैं कहाँ जाऊँ। 
अपनी व्यथा अब मैं किसे सुनाऊं। 
लोगों की नजरों से मैंने, जिसे अब तक छुपाया था। 
कड़ी मेहनत से मैंने ही, मेरा घोसला बनाया था। 

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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