Saturday, April 3, 2021

अमिताभ कुमार दीवान की रचना- इत्र

रचनाकार-अमिताभ कुमार दीवान
जिला-रायपुर छतीसगढ़
विषय-इत्र 
विधा-कविता

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ना जाने किस किस से, करार करता है|
वो बदबू है और इत्र का, व्यापार करता है| 

अपनी ही सरकार है, अपनी ही नौकरशाही,
ठेके में ले लो दारू, अपना ठेकेदार करता है|

धर्म है मेरे कब्जे में ,मैं हूँ धार्मिक नेता,
बीच सड़क पर मेरा ,चकाचक बार चलता है|

मुँह से टपकता अमृत,मन में भरा जहर,
इसी से तो अपना ,कारोबार चलता है|

देखिए जनता को ,नशे में डुबोये रखिये,
जागी हुई जनता ,हुकूमत से तकरार करता है |

अब तो उल्टियाँ आती है ,सब देखकर,
अमित इत्र का अब ,तिरस्कार करता है|

अमिताभ कुमार दीवान 

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