संबलपुर, जिला-कांकेर, (छ .ग.)
विषय-संगम,दिनाँक-07.04.21
संगम
साहस, संयम के
संगम में हर्ष का प्रवाह हो।
जीवन जितना भी कठिन
हो समरसता का बहाव हो ।।
भावनाओं की नदी
बहती रहे सदा।
पावन गंगा जैसा कालजयी
रचनाओं का संवर्धन हो।।
गंगा जमुना सरस्वती
का जैसे होता मिलन।
संगीत के सात सुरों के
संगम से गीतों को मिलता जीवन।।
निष्काम कर्म की हो प्रधानता
स्वार्थ से दूर रहे तन मन। अंतरात्मा की आवाज सुन
हम करें नित प्रभु का वंदन।।
कवि का अंतस कोमल,
विस्तृत और पावन होता।
कवि हृदय में प्रेम साहस संयम
सौहार्द्र का संगम होता।।
अलौकिक अद्वितीय शब्दों वर्ण
और भाव का जब सृजन होता। जीवन रस घोल दे ऐसी
संगीतमय रचनाओं का सरगम होता।।
_______________________
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
No comments:
Post a Comment