Wednesday, April 7, 2021

गोमती सिंह की रचना- संगम

कवयित्री-गोमती सिंह 
जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय- संगम 
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक- संगम 
---नदियों में संगम होता है ,
क्यों मानवों में नहीं होता !

गर मानव मन में संगम होता,
भवसागर सुखमय हो जाता ।

प्रकृति स्वच्छ है ;
उनमें मलिनता नहीं होती,

क्यूँ मानव मन भी प्रकृति के ; 
स्वच्छतासे  प्रेरित नही होते ।

नदियों में विवेक कहाँ!
वो पवित्र ढाल में बह जाती हैं ,

मानव विवेकशील होकर भी ;
महज स्वार्थ में गति करते हैं।

ईश्वर से हम मन्नत मांगे ;
मानव मन भी पावन हो जाए ,

फिर परिवार, समाज और राष्ट्र मिलाकर ,

विश्व का संगम हो जाऐ ।

विश्व का संगम हो जाए ।
        ।।इति।।
     " गोमती सिंह "
     कोरबा, छ.ग.

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...