Saturday, April 3, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- इत्र

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-इत्र
विधा- कविता (मुक्त छंद)

 सिर्फ इत्र ही नही ,
  कुछ शख्सियत भी
    अक्सर महका करते हैं ,
        इत्र की ही तरह|

जीते हैं जो  निशदिन 
   परहित में इस जहाँ में,
    व्यक्तित्व उनका इत्र 
        से कम  तो नहीं|

कर्मठता,सदभावना,
    सहयोग,भाईचारा,
       ऐसे इत्र हैं ,जो शीशी
           के मोहताज नही|

अपनत्व का इत्र तो
   महकता है सभी दिशाओं
     में हर पल,हर दिन
       रजनीगंधा की तरह|

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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