जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-इत्र
विधा- कविता (मुक्त छंद)
सिर्फ इत्र ही नही ,
कुछ शख्सियत भी
अक्सर महका करते हैं ,
इत्र की ही तरह|
जीते हैं जो निशदिन
परहित में इस जहाँ में,
व्यक्तित्व उनका इत्र
से कम तो नहीं|
कर्मठता,सदभावना,
सहयोग,भाईचारा,
ऐसे इत्र हैं ,जो शीशी
के मोहताज नही|
अपनत्व का इत्र तो
महकता है सभी दिशाओं
में हर पल,हर दिन
रजनीगंधा की तरह|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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