Tuesday, April 6, 2021

विनोद कुमार "जोगी" की रचना- नक्सलवाद

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद 
विषय :- बीजापुर
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- बीजापुर और नक्सलवाद

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दक्षिण बस्तर में बसा, उपवन सुन्दर एक।
विश्व पटल में है छटा, किस्से सुनो अनेक।।१।।

मातु धरा की कोख में, मानो दीप समिद्ध।
बीजापुर के नाम से, जग में हुआ प्रसिद्ध।।२।।

कल - कल करती नित्य ही, बहे नदी की धार।
प्यास हरे सबकी सदा, बाँटे सब में प्यार।।३।।

भैरमगढ़ - पामेड़ हैं, अभय विजन श्रृंगार।
झर-झर निर्झर नित झरे, ज्यों घुँघरू झनकार।।४।।

मगर नज़र किसकी लगी, छाया है आतंक।
आतंकी मर्दन करें, घूमे सदा निशंक।।५।।

सरकारी हर काज में, बाधा नक्सलवाद।
शोषित वर्गों की सदा, उर में भरें मवाद।।६।।

निज उल्लू सीधा करें, सेवा की ले आड़।
उकसाते हैं नित्य ही, चढ़ा चने की झाड़।।७।।

दीमक जैसा रूप ले, नक्सलवादी लोग।
खाते सारे देश को, बनकर नित नव रोग।।८।।

सदा विरोधी भाव ले, धरते नित हथियार।
वीर जवानों पर करें, सदा पीठ पे वार।।९।।

हाथ जोड़ जोगी कहे, छोड़ो नक्सलवाद।
कहो समस्या आपकी, चलो करें संवाद।।१०।।

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