Tuesday, April 20, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- ठिहार

नाम ----गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति 
जिला ----जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा--    कविता
विषय  ---ठिहार
शीर्षक---- मैं ठिहार अब 

मैं ठिहार अब बन तो गया हूं।
  आज के मामले में नया हूं ।

लोग मुझको नहीं जानते हैं ।
मैं अभी तक नया ही नया हूं ।

चार दिन की नजारे सुहानी ।
 बन गई मैं यहीं रह गया हूं ।

   लोग तो आजमाते रहे हैं ।
आजमालो मुझे कह दिया हूं ।

  जो चली राग है वो पुरानी ।
  राग गाया नहीं वो नया हूं ।

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