जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- ठिहार
विधा-कविता( मुक्त छंद)
क्षणिक है सब खुशियाँ,
क्षणिक है यह जीवन|
पर इस नश्वर जगत में,
प्रभु !तेरा ही ठिहार है|
कृपा हो तेरी तो सूरज,
चाँद,सितारे हैं चमकते|
धरती पर यह हरीतिमा,
अद्भुत सुंदर संसार है|
कहर इस महामारी का,
ढहेगा जल्द धरती से|
वीरानी भी है क्षणिक,
प्रबल मेरा विश्वास है|
यकीन है कहर ठहेगा,
नीर नेह का बहेगा ही|
उसकी रचना स्वर्ग-सा
सुंदर ऐसा ही ठिहार है|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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