Saturday, April 3, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- इत्र

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,जिला-कांकेर,( छ.ग.)
      विषय-इत्र,       
          दिनाँक-03.04.21
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                *इत्र*

मेरी पावन धरा 
तुझको करती हूँ नमन ।
तेरी सोंधी सुगंध इत्र को करे 
लज्जित करुँ तेरा वंदन।

तेरी गोद में जन्म लिया 
मस्त बयारों ने झुलाया। 
माँ की ममता की गंध ने 
इत्र की सुगंध को झुठलाया।

संदल,मोंगरे,गुलाब की गंध 
लिए इत्र को मैंने आजमाया।
मेरी वसुधा,मेरी जन्मदात्री 
माँ की छुअन को ही बेहतर पाया ।

इत्र से ज्यादा और जीवन भर
महकती है तेरी ममता ।
सारे जग की क्या कहूँ ,
तीनों  लोक में नहीं है समता।

माँ के लिए मैं एक अर्क उसने 
पूरी बगिया को सुगंध से भरमाया।
माँ और मेरी धरणी की 
ममता ने पूरा जीवन महकाया ।

मेरे सीने में दिव्य इत्र की 
सुगंध की तरह महकती है।
तुम्हें एक नजर देख 
दुनियाँ मेरी चहकती है ।

रोम-रोम तेरी यादों की 
सुगंध से भर जाती है,
जज्बातों की सुरभि मेरे 
जेहन में इत्र सा समा जाती है।

      नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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