जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग)
विषय - इत्र
- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -
इत्र के जैसे बनाओ अपना व्यवहार,
जो खुद घिसे पर महके अपार।
मेरी पावन धरा की महक इत्र से कम नहीं,
मेरी जननी के जैसी स्नेह और ममता दिखती नहीं कहीं।
इत्र सी खुशबू बिखेर रहे मेरे भारत के जवान,
जो खुद मिटकर बचाते भारत की आन -बान- शान।
चन्दन, गुलाब, मोंगरा घिसकर इत्र बनाता है,
इत्र भी हर पग पर हमें समर्पण का भाव सिखाता हैं।
मेरे देश की मिट्टी में हैं प्रेम की खुशबू का एहसास,
जो इस दुनिया के इत्रों में हैं सबसे खास।
हे वसुन्धरा मैं भी इत्र के समान बन जाऊ,
खुद मिटकर दूसरों के जीवन को महकाऊ।।
।।इति।।
श्वेता सिंह क्षत्रीय
जांजगीर
No comments:
Post a Comment