Tuesday, April 20, 2021

अनुरमा शुक्ला की रचना -ठिहार

रचनाकार -अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक- ठिहार 

ठनी हुई है आज जीवन-मृत्यु में
मगर..
जीजीविषा भी अड़ी हुई है ।

ऐ प्रभु तुम से ही है ठिहार
कभी तो..
प्रार्थना हमारी स्वीकार होगी ।

माना निराशाओं के बादल हैं आज
कल यही...
आशाओं की बूंद बनकर बरसेंगी ।

प्रकृति फिर उल्लास मनायेगी
हर तरफ...
हरियाली ही नज़र आयेगी।

रहते नहीं दिन सदा एक जैसे
है ठिहार...
फिर दुनिया मुस्कुराने लगेगी ।।

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