Friday, April 16, 2021

सूर्य प्रकाश पाटिल कृत आलेख- जहाज़

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा आलेख
विषय जहाज़

          दृश्य रूप में देखा जाए तो जहाज़ दो प्रकार के होते हैं, पहला हवाई जहाज और दूसरा जल जहाज़। दोनों ही जहाजों का मुख्य कार्य विभिन्न मनुष्यों को भिन्न भिन्न हवाई अड्डों या बंदरगाह पर रुकते व छोड़ते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं।
            इसी प्रकार प्रत्येक मानव का जीवन या मानव शरीर भी एक जहाज़ की तरह है, जो जो मानव आत्मा को विभिन्न पड़ाव जैसे बालपन युवावस्था, वृद्धावस्था,सुख, दुःख से होते हुए मानव शरीर अपने गंतव्य अर्थात श्मशान भूमि तक पहुंच जाता है।
            मानव तन तो जल जाता है या दफन हो जाता है, परन्तु इस मानव तन रूपी जहाज़ का जो यात्री है आत्मा वह अपने कर्म अनुरूप अपनी सद्गति को प्राप्त होता हैं, या तो वह मोक्ष को प्राप्त कर ईश्वर को प्राप्त करता है या फिर से कोई नया शरीर प्राप्त कर जहाज़ रूपी शरीर से पुनः यात्रा आरंभ करता है।
             जल जहाज़ या हवाई जहाज में तो कई बार यात्रा किया जा सकता है परंतु मानव तन रूपी जहाज़ बहुत तपस्या के फलस्वरूप ही प्राप्त होता है। इसकरण हमें इस जहाज़ का सदुपयोग करते हुए सदमार्ग पर चलते हुए नेक व पुण्य कार्य करना चाहिए, तभी यह मानव तन रूपी जहाज़ आत्मा रूपी यात्री को सद्गति तक पहुंचा सकता है और मोक्ष को प्राप्त करता है......। 
             सूर्य प्रकाश पाटिल

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