स्थान- कचंदा
जिला- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विषय- जहाज़
विधा- कविता (गीत)
शीर्षक- जहाज़
जहाज़
लोहा उड़े आकाश में बन हवाई जहाज।
लोहा तैरे पानी में बनकर पानी जहाज।
बनकर पानी जहाज़, कैसी विस्मित राज।
विज्ञान का चमत्कार, जिन पर हमें नाज।
कह "प्रधान" कविराय, कवि की न दोहा।
पक्षी बन उड़ रहे, जहाज रूपी यह लोहा।
परिवहन का त्वरित साधन हवाई जहाज।
पल भर में पहुँचाता, अम्बर का सरताज।
अंबर का सरताज है यह अद्भुत विमान।
समय बचत करता मुसाफिर का कल्यान।
कह "प्रधान" कविराय, जगत का हरिहरन।
तेज गति से चलता यह त्वरित परिवहन।
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