*स्थान - नौगाँव(छतरपुर)म.प्र.*
*विषय -गवेजा*
यूं न चुप बैठे रहो ,
कुछ तो वार्तालाप करो।
जब तक संवाद न करोगे,
दूरियाँ ये बढ़ती रहेंगी।
रिश्तों का ये काँरवा,
आगे बढ़ाता चल जरा।
करले तू फिर से गवेजा,
संयम भी तू रख जरा।
क्रोध त्याग दे जरा ,
विनम्रता से काम ले।
भावना में बह जरा ,
रिश्तों को तू जोड़ ले।
विचारों को सुन जरा,
एक - दूजे को गुन जरा।
मित्रता की पहचान करले ,
फिर से वार्ता लाप करले।
है बाहर लाकडाऊन ,
बैठ तू अन्दर ही मिलके ।
करले फिर से तू गवेजा,
मौके को तू यूँ न गवाँ।
बस मानव जाति को मिला,
ये अनमोल तोहफा।
व्यक्त करले भावना को,
बाँट ले तू एक दूजे से,
शब्दों का ये काफिला।
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