Thursday, April 8, 2021

मोनालिसा बेहरा कृत आलेख- चार

रचियता-मोनालिसा बेहरा
सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा-आलेख
विषय-चार-चिरौंजी

                  चिरौंजी हमारे देश के मुख्य सूखा मेवा की श्रेणी में आता है।यह भारत के कुछ ही राज्यों में पाया जाता है जैसे ओडिशा,छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार,मध्य-प्रदेश, छोटा नागपुर और दक्षिण भारत में।इसके पेड़ बहुत ज्यादा बड़े नही होते लेकिन छाल बहुत खुरदुरी होती है।
               इसके पेड़ को चिरौली या पयाली कहा जाता है। गांवो में रहने वालों के बचपन की यादों में चार-चिरौंजी का मुख्य स्थान है ।फागुन पूर्णिमा को चार का भगवान के सामने भोग लगाया जाता है उसके बाद ही इसे खाते हैं।बच्चे टोलियों में जाकर चार तोड़ लाते हैं और पहले चार के मीठे फलों का मज़ा लेते हैं और गुठली से गिरी निकाल कर चिरौंजी का।पर अब यह इतना महंगा हो गया है की आम आदमी के पहुंच से बहुत दूर है।इसने महंगाई में पिस्ता -काजू को भी पीछे छोड़ दिया है।
                       चिरौंजी के बहुत सारे गुण है यह औषधि गुणों से भरपूर है जैसे-सिरदर्द, सर्दी-जुकाम,बुखार, गठिया, खांसी,यौनरोग इत्यादि में विशेष तौर से इसका प्रयोग किया जाता है। मूलतः चार -चिरौंजी का प्रयोग मिठाई बनाने में होता है जैसे खीर,लड्डू,बर्फी आदि।बच्चों के मानसिक विकास और स्वास्थ्य के लिए चिरौंजी बहुत ही उपयोगी है।भारत ही नही विदेशों में भी इसकी बहुत मांग है और इसी कारण इसकी कीमत बढ़ती ही जा रही है।चिरौंजी के लड्डू खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं।

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