जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-चार-चिरौंजी
विधा-कविता (मुक्त छंद)
वनोपज चार-चिरौंजी,
प्रकृति के ये अनुपम
अद्वितीय हैं उपहार।
बिचौलियों के हाथों
बेचते हैं ग्रामीण इन्हें
मिलते हैं कम दाम।
विलुप्ति के कगार पर
चार के पेड़ हैं आज
संरक्षित करें इन्हें अब ।
चार बहुत स्वादिष्ट लगे,
चिरौंजी हैं पकवानों के
स्वाद का है सरताज।
चार वृक्ष वन की शान,
चिरौंजी की बड़ी मांग,
इनसे बस्तर की पहचान ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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