जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग)
विषय - सरहदें
सरहदें न बाँट सकी, पंछियों की उड़ान को.
सरहदें न बाँट सकी, नीले आसमान को.
सरहदें न बाँट सकी, नदियों की कलकल धारा.
सरहदें न बाँट सकी, समुद्र से उठती लहरा.
सरहदें न बदल सकी, इंद्रधनुष के रंग.
सरहदें न बदल सकी, धरती- आसमान के संग.
सरहदे नहीं मोड़ सकती, हवाओं के रुख.
सरहदें न बदल सकती, कोयल की कूक.
फिर क्यों सरहदों के लिए, लड़े जा रहें हैं.
ये पाकिस्तानी हमारी काश्मीर के लिए, मरे जा रहें हैं.
न जाने कितने वीरों ने, सरहदों पर जान गवाई.
खून का कतरा-कतरा बहाकर, हमारी काश्मीर बचाई.
जब पाकिस्तानी पार कर गए, अपनी सारी हदें.
तब भारत और पाक के बीच, बना नफरतों की सरहदें..
बहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteVery nice
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