Wednesday, March 31, 2021

श्वेता सिंह क्षत्रीय की रचना- सरहद

रचियता - श्रीमती श्वेता सिंह क्षत्रीय
जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग)
विषय - सरहदें

सरहदें न बाँट सकी, पंछियों की उड़ान को.

सरहदें न बाँट सकी, नीले आसमान को.

सरहदें न बाँट सकी, नदियों की कलकल धारा.

सरहदें न बाँट सकी, समुद्र से उठती लहरा.

सरहदें न बदल सकी, इंद्रधनुष के रंग.

सरहदें न बदल सकी, धरती- आसमान के संग.

सरहदे नहीं मोड़ सकती, हवाओं के रुख.

सरहदें न बदल सकती, कोयल की कूक.

फिर क्यों सरहदों के लिए, लड़े जा रहें हैं.

ये पाकिस्तानी हमारी काश्मीर के लिए, मरे जा रहें हैं.

न जाने कितने वीरों ने, सरहदों पर जान गवाई.

खून का कतरा-कतरा बहाकर, हमारी काश्मीर बचाई.

जब पाकिस्तानी पार कर गए, अपनी सारी हदें.

तब भारत और पाक के बीच, बना नफरतों की सरहदें..

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