जिला-रायपुर छतीसगढ़
विषय-सरहदें
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जिस्म की सरहद है, तो रूह में बाँट ले|
मैं घूमता हूँ करोड़ो में, तू हजारों में छाँट ले|
ए माली तू रखवाली कर, जिस्म का फूलों के,
खुशबू फैलेगी दूर तक ,बात गांठ बाँध लें|
एहसास मदमस्त कराती है मुझे, उसकी,
अरे फूल है, खुशबू आएगी,तू कितना ही ढाँक ले|
मोहब्बत, स्टाम्प में लिखी, जागीर थोड़ी है,
जिससे होनी होगी,होगी,तू कितना ही नाच ले|
मैं जिंदगी गुजार सकता हूँ, उसके बातों के लहजे में,
मैं रूहानी खुशबू में खुश हूँ, तुझे लेना है तो जिस्म का ताप ले|
अमिताभ कुमार दीवान
रायपुर छतीसगढ़
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