स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक- सरहद पार
ये कैसी विपदा देश में आई,
जन जन में खौफ है छाई,
सरहद पार से जाने किसने
हवाओं में जहर घोल फैलाई
सैन्य बल भी हुये नाकाम
ऐसी दुश्मनी किसी ने निभाई
साँसो की डोर जो थम रही
काम ना आती कोई दवाई
पैसे सुविधाएं सब सूक्ष्म हो गये
सूक्ष्म ने ही अति कहर है ढाई
राजा-रंक सब एक समान
चेहरे से इसे पहचान ना आई
टीकाकरण सुरक्षित उपाय
मेहनत से जो सफलता पाई,
जन-जन में जागरूकता लाकर,
अब देश सुरक्षित कर लो भाई ।।
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