स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ----जांजगीर-चांपा--/ छत्तीसगढ़
विधा---आलेख कविता ग़ज़ल
विषय --विनाह
शीर्षक - भूल जाओ विनाह
विनाह जीवन को देता सहारा ।
डूबते को मिलता इससे किनारा ।
इसका दौर अब पहले जैसा नहीं ।
इसके चाहने वालों ने भी हिम्मत हारा ।
पहले चाहने वालों की खोज होती थी ।
आज उसका विपरीत हो रहा है ।
उसी के लिए पढ़ लिख रहे लोग।
जाग रहे खुद भाग्य रो रहा है ।
विनाह के लिए भटकते लोग ।
कभी कहीं के नहीं रहते ।
जिनके हाथों में है दम ।
उन्हीं के हाथों में गंगा बहते ।
उम्र ढ़ल जायेगा विनाह।
लेकिन हाथ नहीं आयेगा ।
जो भूलेगा विनाह को ।
वही संवर जाएगा ।
मैं हर किसी से कहता हूं ।
हाथों में विनाह की राह लाओ ।
कोई और राह अपनाओ ।
इसका रट लगाना भूलाओ ।
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