जिला -रायपुर छतीसगढ़
विषय-चंदन
विधा-कविता
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वो जो ,अड़ा अड़ा सा है|
खुशबू में, केवड़ा सा है|
बातेँ कभी उथली, कभी गहरी,
कभी लगता ,बिल्कुल बेवड़ा सा है|
बोलता है स्पष्ट ,छल निरंक,
वो कोइ धन, गड़ा सा है|
मुझसे करता है बकबक,
कभी बेसिर पैर, कभी धड़ा है|
कभी लगता है, सृजनकर्ता कुम्हार,
कभी लगता है, जैसे सृजित घड़ा है|
मैं सोचती हूँ आखिर अब क्यों
वो मेरे पीछे ही पड़ा है|
कभी उसकी बातें, सिहरा जाती है|
कभी उसकी खुशबू,चंदन सा निखरा जाती है|
अमिताभ कुमार दीवान
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