जिला - सोनपुर, ( ओडिशा )
शीर्षक - चंदन
विधा -कविता
औषधि प्रसाधन आदि
चंदन के है गुण
हजार
सिर माथे सुशोभित होय
प्रभु का है अनन्य श्रृंगार ।
चंदन की शीतलता अनूप
श्रेष्ठ इसका गुणवत्ता
भुजंग के संग रहकर भी
बनाए रखा जो निज सत्ता ।
संसार का हर वर्ग हर जाति
इसकी लोहा को माने हैं ।
आस्तिक हो चाहे हो
नास्तिक
चंदन का गुन पहचाने हैं ।
तपन के ताप से हो बचना
या बढ़ानी हो औषधि का प्रभाव
चंदन के सरिस ना कोई
शीतल सरल स्वभाव ।
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