जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय-चंदन
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक-मलयज
----श्रीविष्णु के मस्तक में शोभित मलयज ।
पूजन अर्चन में संमिलित हैं मलयज।
वसुंधरा को सुगंधित करते ,
प्रकृति के सुंदर कानन मलयज ।
मलयज सम जब मन हो अपना ,
तब महकते हैं जीवन धन अपना ।
सुवासित वचनों से महके ,
मलयज सम हर रिश्ता अपना ।
औषधि मे भी शामिल है मलयज ,
सौंदर्य प्रसाधनों का प्रमुख तत्व हैं मलयज।
जीवन के प्रारंभ से लेकर,
अंत्येष्टि तक संग होते हैं मलयज ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
बहुत सुंदर कविता ।
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