Friday, March 19, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- व्रीहि

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,जिला-कांकेर,( छ.ग.)
        विषय-व्रीही,
            दिनाँक-19.03.21
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              *व्रीही*

खेत खलिहान में 
धान की फसल जब होती,
धरा धन्य हो उठती, 
बालियां तब तब नजर झुकाती।

पावस के आते ही खेतों में 
हल ले जा किसान हर्षाते ,
भरपूर धान से चाँवल 
निकले ईश्वर को मनाते ।

धान का कटोरा 
कहलाता यह प्रदेश,
अन्न से भरा रहता 
सदा इसका परिवेश।

अक्षत,आखत,तन्दुल,
अटूट है कहलाता,
देवों  के सर चढ़ अपने 
भाग्य पर इठलाता। 

घनघोर गर्जन तर्जन के 
बीच हँसता किसान,
कृषक करते रहते निरन्तर 
श्रम बढ़ाते और धरा की शान।

धान जब खेतों में 
पक कर खलिहान है आता ,
सारा भुवन इंद्रधनुषी 
रंगों से सज जाता ।

*व्रीही* है लोगों के 
जीने का आधार,
किसान लाभ हानि ना 
देख व्रीही देता अपार।

भोजन के  रूप में  यह 
बनता  प्रमुख आहार,
विभिन्न व्यंजनों का 
बनता यह स्वादिष्ट आधार।

       नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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