निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर , छत्तीसगढ़ ।
विषय-व्रीहि ।
विधा- छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक- "" व्रीहि "" ।
●●••••|| व्रीहि ||••••●●
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व्रीहि जगत का,अनमोल वरदान है--
ये,जीवन का, आधार भी है ।
आदिकाल से ही ये---
भोजन सामग्री है बना ,
कई देशों की है शान,
जब बनते हैं,इसके पकवान ।
वर्षा ऋतु , खरीब की फसल---
कहीं एक फसली,तो कहीं दो फसली,
लगता इसको,भरपूर है पानी,
पकने के लिए,लगे कड़क धूप ।
व्रीहि की फसल होने पर--
कहीं ओणम तो,कहीं बीहू का,
त्यौहार के रूप में मनाया जाता है ।
व्रीहि का दाना ---
बनता है,पूजन सामग्री,
खीर,अक्षत ,कहीं आटा बन,
तो कभी,भाल में,सौभाग्य टीका बने।
व्रीहि,मानव के साथ-साथ ---
पशु ,पक्षियों का,आहार होता,
और उनकी भूख है मिटाता ।
व्रीहि से,बने कई भोज्य पदार्थ--
पोहा,मुर्रा ,बिस्कुट,बुर्रा,चीला,
भात और रोटी में प्रयोग होता ।
किसानों की होती ,प्रमुख फसल--
आर्थिक समृध्दि व संकट मोचक,
जीवन विकास की है मुख्य धुरी ,
करते पूजा,धन लक्ष्मी के रूप में ।
कई देशों की है,मुख्य फसल--
उनके आर्थिक विकास का पैमाना,
इसके बिन,भोजन होता अधूरा ।
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