Monday, March 8, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- निराकार

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.)
       विषय-निराकार
      दिनाँक-08.03.21

              निराकार
 हे निराकार !तुम सत्य हो,
         शाश्वत हो,सत्य के साक्षात्कार 
संग शुभ आगत हो।

 गूंगे के गुड़ के समान 
           मौन अभिव्यक्ति हो,
 प्राणों में बसने वाले
            तुम अदृश्य शक्ति हो ।

काया नश्वर है, 
          आत्मा अमर है, कैसे बताऊं तुम्हें निराकार ईश्वर हो।

 ज्ञान से उजास भर 
             तिमिर हरने वाले हो,
 मेरी आशाओं पर तुम
                 खरे उतरने वाले हो ।

मेरे मन का विश्वास
             तुम सत्य सनातन हो,
 सर्वव्यापी अविनाशी 
                सदचिंतन हो ।

सत्य, त्याग, प्रेम 
         का करुँ सदा अनुसरण ,
मृदु वाणी से जग का द्वेष,
             दंभ का करुँ हरण ।

हे सर्वव्यापी, सच्चिदानंद,
             परमानन्द परमानंद हो,
 दिव्य चिरंतन तुम परब्रह्म 
              तुम जग के स्वामी हो।
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       नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)

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