संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.)
विषय-निराकार
दिनाँक-08.03.21
निराकार
हे निराकार !तुम सत्य हो,
शाश्वत हो,सत्य के साक्षात्कार
संग शुभ आगत हो।
गूंगे के गुड़ के समान
मौन अभिव्यक्ति हो,
प्राणों में बसने वाले
तुम अदृश्य शक्ति हो ।
काया नश्वर है,
आत्मा अमर है, कैसे बताऊं तुम्हें निराकार ईश्वर हो।
ज्ञान से उजास भर
तिमिर हरने वाले हो,
मेरी आशाओं पर तुम
खरे उतरने वाले हो ।
मेरे मन का विश्वास
तुम सत्य सनातन हो,
सर्वव्यापी अविनाशी
सदचिंतन हो ।
सत्य, त्याग, प्रेम
का करुँ सदा अनुसरण ,
मृदु वाणी से जग का द्वेष,
दंभ का करुँ हरण ।
हे सर्वव्यापी, सच्चिदानंद,
परमानन्द परमानंद हो,
दिव्य चिरंतन तुम परब्रह्म
तुम जग के स्वामी हो।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)
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