जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-निराकार
विधा-कविता( मुक्त छंद)
हे अनन्त,अविनाशी
तेरी महिमा भारी।
तू ही निराकार ब्रह्म,
तू सर्वव्यापी सर्वज्ञ ।
तू अमर ,अदृश्य शक्ति
कैसे करें तेरी भक्ति ।
अंतर्मन को ज्योतित हो
ऐसी शक्ति हमें भी दो।
तू अंतर्यामी,सबका स्वामी
हे जगदीश, हे अंतर्यामी।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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