Monday, March 8, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- निराकार

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-निराकार
विधा-कविता( मुक्त छंद)

हे अनन्त,अविनाशी
तेरी महिमा भारी।

तू  ही निराकार ब्रह्म,
तू सर्वव्यापी सर्वज्ञ ।

तू अमर ,अदृश्य शक्ति
कैसे करें  तेरी भक्ति ।

अंतर्मन को ज्योतित हो
ऐसी शक्ति हमें भी दो।

तू अंतर्यामी,सबका स्वामी
हे जगदीश, हे अंतर्यामी।।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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