जिला/राज्य-----जांजगीर -चाम्पा (छ.ग.)
विषय -- व्रीहि
शीर्षक ---व्रीहि की विशेषता
देवो के वंदन में व्रीहि
धरती के तन मन मे व्रीहि ।
किसानों के एहसासो में व्रीहि
चिड़िया के दानों में व्रीहि ।
खेत खलिहानो में दुल्हन सी सजी व्रीहि
राजा हो या तपस्वी सब के संग व्रीहि ।
प्रकृति की सुंदरता में व्रीहि
मोतियों के दानों सा दिखता व्रीहि।
बूढ़े हो या बच्चे सब का भूख मिटाता व्रीहि
अमीर हो या गरीब सब को चैन सा सुलाता व्रीहि।
पूजा की थाली में व्रीहि
छोटे बड़े सबके खुशहाली में व्रीहि।
जन्म के सुखद एहसास में व्रीहि
मृत्यु के अंतिम परिणाम में व्रीहि।
जीवन की हर कदम पर खास व्रीहि
धरती माँ की सुखद एहसास व्रीहि।
व्रीहि से जुड़ा है सारा संसार
व्रीहि के बिना अधूरा है हमारा प्यार ।
बहुत शानदार कविता
ReplyDeleteBahot sunder
ReplyDeleteVery Nice
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteGood to read
अप्रतिम
ReplyDeleteबहुत ही उत्कृष्ट रचना
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteVery nice kavita
ReplyDeleteShandar kavita
ReplyDeleteDil ko Chu li apki likhi Kavita ne..bhut hi Sundar Kavita hai Bhabhi.
ReplyDeleteVery good bhn
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