जिला- रायपुर छतीसगढ़
विषय -फागुन
विधा-छंदमुक्त कविता
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मेरे भावों को बनाये रखना,
मैं एहसास लिखूँगा|
जो किसी ने ना लिखा होगा आजतक ,
वो बात लिखूँगा||
मौसम तो बदलते रहेंगे मौसम की तरह ,
तुम न बदलना,
देखना इस फागुन में तुझे पलाश लिखूँगा|
मैं तुझे फागुन का फ़ाग लिखूँगा|
नगाड़ो की बजती राग लिखूँगा|
महकती हो तन मन मे गुलाब की तरह,
मैं तुम्हें जंगल की आग (टेसू) लिखूँगा|
चुड़ी रँग का चटक लाल लिखूँगा|
आँगन में लगा तिरपाल लिखूँगा|
गालों में चमकती रंग ए अबीर,
मैं तुझे जिंदगी का गुलाल लिखूँगा
मैं तुझे अजब तमाशा लिखूँगा|
मीठा ऐसा की बताशा लिखूँगा|
नवलखा शक्कर के हारों का हार,
मैं तुझमें अपना श्रृंगार लिखूँगा
मैं तुझे डायल ए नंबर रॉन्ग लिखूँगा|
जो बजा नही वो सुनहरा सांग लिखूँगा|
चढ़ता तो है पर उतरता नही है,
मैं तुझे होली का भांग लिखूँगा|
मैं तुझे खेलते बच्चों की किलकारी लिखूँगा|
दूध मलाई से बनी ठंडाई की किनारी लिखूँगा|
कुछ रंग और बिखर जाने दे,
मैं तुझे रँगों की पिचकारी लिखूँगा|
अमिताभ कुमार दीवान
रायपुर छतीसगढ़
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