जिला:-कांकेर (छ. ग.)
विधा:-छंद मुक्त कविता
विषय:-सरहदें
शीर्षक:-सोचो अगर ऐसा होता
सोचो अगर ऐसा होता,
मेरा देश प्यारा देश,
उसका देश भी न्यारा देश।
जैसे मेरी कौम मुझे प्यारी,
वैसे उसकी कौम उसे न्यारी।
मेरा धर्म मेरे लिए अच्छा,
उसका धर्म उसके लिए सच्चा।
मेरी जाति जितनी अच्छी,
उसकी जाति भी उतनी अच्छी।
सोचो अगर ऐसा होता,
क्या होती सरहदें?
क्या द्वेष और बैर होता?
मानव मानव एक समान कह,
हर इंसान चैन की नींद सोता।
काश सबकी ऐसी सोच होती,
तब दुनिया स्वर्ग से कम न होती।
-कु.गरिमा पोयाम
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