रचनाकार -उर्मिला सिदार
ग्राम-बुलाँकी
जिला- रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा -कविता
विषय -धरा
दिनांक -23 /0 3 /2021
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*धरा*
हे समृद्धि अखंड धरा ,
सदैव शुभ हो वसुंधरा ।
तेरी गोद में वन संपदा ,
गर्भ विपुल खनिजों से भरा ।
सागर ,सरिता जल से भरे हैं,
वन- कानन वनस्पति फैले हैं।
निर्झरणी धारा बह रही है ,
धरा की प्यास बुझा रही है।
भूमि है विकास का आधार,
करती है वसुधा सब का उपकार।
शस्य श्यामला धरा का श्रृंगार,
करती है धरामाँ सबका उद्धार।
हे उपकारी समृद्धि भूमि ,
हम कभी क्षति नहीं पहुंचाएंगे।
सदुपयोग ,संवर्धन ,संरक्षण कर,
हम तेरे उपकार चुकाएँगे।
तेरी वैभव बना रहे सदैव ,
हम यही कामना करते हैं।
चिरकाल तक तू समृद्ध रहे,
हम ऐसी अपेक्षा रखते हैं।
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उर्मिला सिदार ,रायगढ़ छत्तीसगढ़
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