स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला---- जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख/ कविता/ ग़ज़ल
विषय ---व्रीहि
शीर्षक--- सब कुछ अन्न
जिनके खेतों में अनाज भरा, वो जग के महाराज हैं।
उसी से बनते काज सभी,उसी से सुख के ताज हैं ।
अनाजों से गणना होती, हमारे आज और कल की ।
केन्द्र बिन्दु वह कहलाता,सफल और असफल की ।
किसान के मेहनत का नतीजा ,सारी दुनियां भोगता है।
किसान का मेहनत बेकार हुआ,तो बार बार सोचता है ।
किसान अनाज का मालिक ,खेत है उसका वेद ।
दिन रात उसे पढ़ता वह, जिसमें छिपा सबका भेद ।
समृद्धि अनाज से है,उसकी लोहा सब मानते ।
भूखा कुछ नहीं कर सकता,ये गुण सभी हैं जानते ।
कोई भी कार्य बिना अन्न का, सम्पन्न कहीं न पाओगे ।
दान पुण्य धर्म यज्ञ जो भी हो, उसकी शरण में आओगे ।
अनाज हमें सबल बनाता,अनाज से हम निर्बल है ।
बिन अनाज हमारी न गणना, कहलाते उसी से उज्जवल है
तारणहार अनाज है अपना, पालनहार वही है ।
बिन अनाज खुद को मृत मानों, बात सौ प्रतिशत सही है ।
वह भू धन्य जहां अनाज उगते,और खुशहाली लाते हैं ।
इसीलिए जननी से भी, जग में पूज्य कहलाते हैं ।
अन्न की कद्र करना सीखो, अन्न उपजाने में हाथ बटाओ।
किसान का जीवन जैसे भी हो,उसे देखकर न शरमाओ ।
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