Tuesday, March 23, 2021

अमिताभ कुमार दीवान जी की रचना


रचनाकार-अमिताभ कुमार दीवान
जिला-रायपुर छतीसगढ़
विषय-धरा
विधा-कविता

********************
देख ये नदियाँ, ये पर्वत ,ये मैदान ,कितना हरा भरा है|
महसूस कर के देखिए ,पूर्णतः परिपूर्ण ये धरा है|

तेरे माथे सा  हिमालय,तेरे रंगों सी उजली हिम चादर,
घूँघट में हरी साड़ी लपेटे,तू लगती मुझे वसुंधरा है|

बढ़ती है दिल की धड़कन,जैसे धरती में मनता सावन,
उठती है सीने में लहरे ,जैसे उठता समंदर में लहरा है|

तुझ सी प्यारी धरती है ,जब जैसे माथे में सेहरा है,
क्यों नही सुनता मानव पुकार,क्या तू बिल्कुल बहरा है|

स्त्री, प्रकृति,धरती ये जीवन के हैं अंग अमित,
इनको नुकसान पहुचायेगा जो ,समझो वो मरा है|

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...