जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-एकलव्य
विधा-कविता (मुक्त छंद)
उठो युवाओं!अब मत सोओ,
अब तो कुछ नव निर्माण करो।
कटवाया था अँगूठा एकलव्य ने
उसकी कुर्बानी का भान करो।
कब तक सुनते रहोगे यूं ही तुम
औरों के मुख गैरों का इतिहास
एक और एकलव्य बनकर तुम,
जग में रोशन अपना नाम करो।
मिटा दो कुप्रथाएं और सब बंधन,
बना दो भारत भू की मिट्टी चंदन।
एकलव्य की एकाग्रता और लगन
आज भी मिशाल है इतिहास में ।
जाने कितने अर्जुन आगे बढ़ गये,
एकलव्य ही श्रेष्ठ लोग कह कहे।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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