जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय- व्रीहि
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक-व्रीहि
-----व्रीहि है जीवन मूल आधार,
इससे सुनियोजित है संसार ।
व्रीहि से मिलते सामर्थ्य है हमारा ,
मन-विषय जिससे होता न्यारा ।
ईश सृजन लगे फिर प्यारा प्यारा ।
व्रीहि मिटाती क्षुधा हमारी,
हमको देती शक्ति बड़ी भारी
बिन व्रीहि नहीं अस्तित्व हमारा ,
मानव हीन होगा यह संसार सारा ।
।।इति।।
"गोमती सिंह"
कोरबा , छ. ग.
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