Friday, March 19, 2021

गोमती सिंह की रचना- व्रीहि

रचनाकार- गोमती सिंह
जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय- व्रीहि
विधा- छंद मुक्त कविता 
शीर्षक-व्रीहि
-----व्रीहि है जीवन मूल आधार,
इससे सुनियोजित है संसार ।

व्रीहि से मिलते सामर्थ्य है हमारा ,
मन-विषय जिससे होता न्यारा ।

ईश सृजन लगे फिर प्यारा प्यारा ।

व्रीहि मिटाती क्षुधा हमारी,
हमको देती शक्ति बड़ी भारी 

बिन व्रीहि नहीं अस्तित्व हमारा ,
मानव हीन होगा यह संसार सारा ।
      ।।इति।।
   "गोमती सिंह" 
कोरबा , छ. ग.

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