Saturday, March 27, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- नींद

नाम--- गिरधारी लाल चौहान
स्थान -नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा---आलेख/ कविता/ ग़ज़ल
विषय ---नींद
शीर्षक-नींद 

व्यर्थ नींद का 
त्याग मुझसे,
हो जाए हो जाए ।

जितनी जरुरत  मुझको, 
मिल जाए 
 वह मिल जाए।

नींद का पहलवान मुझे,बनना नहीं है ।
कुम्भकरण  जैसी मेरी तमन्ना नहीं है ।

काम हो जिससे मेरी 
दिन चल 
जाए चल जाए ।

नींद की पहाड़ से ,दुनियां परेशान हैं ।
वो मुझसे रहे दूर, हार्दिक अरमान है ।

जागने वाला बन जाऊं 
यह गीत
मन गाए मन गाए ।
नींद की महासागर में ,तैरने वाले तैरते रहे ।
मैं किनारे ही ठीक हूं, इतना समझते रहे ।

इन्तजार न
 मुझे कभी भाता
और न करीब आए ।

नींद को भगाने का योग नहीं करना है ।
बाबा रामदेव को मुझे नहीं समझना है ।

मेरे मन में
यह बात 
घर कर जाए घर कर जाए ।

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