जिला :- महासमुंद
विषय :- नींद
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे "नींद"
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नींद बड़ी अनमोल है, देती नित आराम।
नैन उनींदा हो गया, ज्यों ही आई शाम।।१।।
उर में भरती ताजगी, झंकृत हिय के कोर।
नींद चांदनी सी उड़े, होता ज्यों ही भोर।। २।।
सेहत को अच्छी रखे, करती चिंता दूर।
नियत समय के नींद से, हो ऊर्जा भरपूर।।३।।
नव्य स्वप्न नित देखते, गहराती जो रात।
कांच सरीखे टूटती, देखे स्वप्न प्रभात।।४।।
कुछ कहते आलस भरे, कुछ का कहना और।
दैनिक कार्यों में इसे, माने जग सिरमौर।।५।।
कभी व्यस्त होकर सुनो, करो न इसका त्याग।
जीवन में खुशियाँ भरे, जागे इससे भाग।।६।।
जब जब टेंशन है बड़े, उड़े रात की नींद।
कुछ पल की निंद्रा मिले, चाहे मनुज मिलिंद।।७।।
नींद स्वान सा हो कभी, कभी कुम्भ सी बात।
झटपट उठता स्वान है, कुम्भ जगे नहिँ रात।।८।।
नींद अगर अच्छी मिले, दूर रहे नित रोग।
कहे लोग सब नींद को, एक तरह का योग।।९।।
मैया की लोरी जुड़ी, जुड़ा पिता का प्यार।
नींदो से यादें जुड़ी, सपनों का संसार।।१०।।
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