जिला-रायपुर छतीसगढ़
विषय- नींद
विधा-कविता
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नींद अगर दी है,तो ख्वाब भी देना|
नींद अगर टूटे तो ,जवाब भी देना|
जिंदगी बीत रही है जागते जागते,
सोने वाले पल,वो हिसाब भी देना|
रात बेतकल्लुफ ,अंधियारा है बहुत,
चाँदनी संग, रँग ए माहताब भी देना|
यूँ तो दोपहरी की, सूरज झुलसा देगी,
हिस्से में, थोड़ी सी सैलाब भी देना|
यूँ तो हवाओं में कुछ उदासी है अमित,
प्यास अगर लगे, तो आब भी देना|
अमिताभ कुमार दीवान
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