रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - मोक्ष
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - दुर्लभ है
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// दुर्लभ है //
दीन हीन मानसिकता से ,
देह गेह माया ममता से ,
भोग विकारी अवस्था से ,
मोक्ष की इच्छा दुर्लभ है ।
रोग शोक भय संतापों से ,
संसार के व्यर्थ प्रलापों से ,
निंदा चुगली के बातों से ,
मोक्ष की इच्छा दुर्लभ है ।
इन्द्रिय सुख के लालच से ,
मान बड़ाई और पद से ,
धन संपत्ति के मद से ,
मोक्ष की इच्छा दुर्लभ है ।
अनन्त कर्मों के बंधन से ,
पाप पुण्य के जकड़न से ,
तुच्छ गुलामी जीवन से ,
मोक्ष की इच्छा दुर्लभ है ।
अधम नीचता दुराचार से ,
निकृष्ट विषम व्यवहार से ,
जड़ प्रकृति के प्रहार से ,
मोक्ष की इच्छा दुर्लभ है ।
मन बुद्धि के प्रवाह से ,
भवसागर के भँवर से ,
जन्म मरण के चक्कर से ,
मोक्ष की इच्छा दुर्लभ है ।
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