Thursday, March 11, 2021

मोक्ष पर आलेख - उर्मिला सिदार

रचनाकार - उर्मिला सिदार 
ग्राम - बुलाकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़ 
विधा - आलेख 
विषय - मोक्ष 
दिनांक - 11/03/2021
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               *मोक्ष*
परंपरा में मोक्ष को मरने के बाद प्राप्त होता है अच्छे कर्म करने से ऐसा हमारे वेद शास्त्र वेदांतों में कहा गया है लेकिन मोक्ष क्या है मोक्ष का प्रमाण अभी तक इस संसार में नहीं देखने को मिला है। लेकिन सभी में मोक्ष की कामना रही है। मोक्ष बिना मनुष्य नर्क भोगता है जिसके परिणाम स्वरूप दु:ख मिलता है ऐसा कहा गया है। इस दु:ख के निवारण के लिए हमारे विद्वत जनों आप्त पुरुषों, महर्षियों, देवर्षियों ने अनेक कर्मकांड बताए हैं जैसे पूजा-पाठ, दान, यज्ञ, तीर्थ, व्रत और ना जाने क्या-क्या कर्मकांड बताए गए हैं आज इन कर्म काण्डों से मोक्ष प्राप्त हुआ है देखने सुनने को नहीं मिला है हां लेकिन हर मनुष्य में मोक्ष की कामना देखी गई है। मोक्ष परंपरा विचार में एक रहस्य के रूप में देखा गया है। और माना गया है कि मरने से मोक्ष प्राप्त होता है तो इससे यही कहते बनता है कि मनुष्य मरने के बाद मोक्ष प्राप्त करता है तो सभी मनुष्य एक न एक दिन मरता ही है तो सभी मोक्ष को प्राप्त कर लेता है तो अच्छे कर्म करने की क्या जरूरत मरने के बाद मोक्ष तो मिलेगा ही यह परंपरावादी मोक्ष एक तरह से बनकर रह गया है। मध्यस्थ दर्शन के अनुसार मोक्ष को भ्रम से मुक्ति बराबर मोक्ष कहा गया है अर्थात आस्था (बिना जाने मानकर जीना) भय प्रलोभन यह तीन अमानवीय तत्व है जो भ्रमित होकर गलत कर्म कर समस्या में फंस जाते हैं जिसके परिणाम स्वरूप दुख मिलता है। दु:खी होकर कोई जीना ही नहीं चाहता, हर व्यक्ति दु:ख से निजात होकर निरंतर दु:ख से मुक्ति होकर सुखी से जीना चाहता है। भ्रम से मुक्ति ही मोक्ष है और मनुष्य जीता हुआ भ्रम से मुक्ति होकर मोक्ष को प्राप्त करता है। मरने के बाद उसका प्रमाण नहीं दिखता। जीता हुआ मानव मोक्ष को प्रमाणित करता है। अतः अंत में यही कहते बनता है भ्रम से मुक्ति ही मोक्ष है।
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उर्मिला सिदार 
रायगढ़ छत्तीसगढ़

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