जिला- रायगढ,छत्तीसगढ़
विषय- फगुआ
विधा- कविता
शीर्षक- हर रंग कुछ कहता है
*हर रंग कुछ कहता है*
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हर रंग कुछ कहता है,जीवन में रंग भरता है।
सबकी अपनी मर्यादा,कोई देता है कोई हरता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,,
सफ़ेद शांति,का प्रतीक,पवित्रता का संदेश देता है।
अच्छी सोंच और उच्च विचार, का उपदेश देता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,,
माता की चुनर लाल,जीवन में उल्लास भरता है।
खतरे की पहचान बन,ऊर्जा का संचार करता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,
बंसन्ती, पीला यश है, आनन्द समृद्धि बरसाता है।
माँ गायत्री के आँगन में,निर्मलता को दर्शाता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,,
जामुनी धर्म अध्यात्म और, जीवन का सार बताता है।
हर पथ सुगम सरल करने,हमे राह दिखाता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,
हरा हरियाली का घोतक,जीवन आबाद करता है।
प्रकृति को चंचलता और हास्य से भरता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,
गुलाबी है रंगों की रानी,सुकून के पल देता है।
बढ़ा आत्मीय प्रेम,खुशियो से जीवन भर देता है।
हर रंग कुछ कहता है,,,
नीला रंग गम्भीर है,स्नेह जलवायु को परिभाषित करता है।
जीवन में लाकर पूर्णता,प्राण वायु भरता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,
नारंगी कराता मित्रता का परिचय,जिसमे नम्र दया रहता है।
जहाँ धर्म दर्शन और, शिष्टाचार का अविरल गंगा बहता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,,,
काला रंग अंतरिक्ष का,शून्यता का आभास कराता है।
है सभी रंगों का मिश्रण ,सहन शीलता का पाठ पढ़ाता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,,
भागूआ रंग हिदुत्व का,गेहुआँ प्रेम के गीत गाता है।
जीवन रंगमय बनाकर,संस्कारी रीत सिखाता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,
रंग तिरंगा बनाकर जो,देश का मान बढाता है।
बिखेरकर इंद्रधनुषी छटा,आसमान पर लहराता है।।
हर रंग कुछ कहता है,,,
आओ हम भी इस होली में ,सबको रंग लगाएं।
बैरता को भूल,रंगों में सराबोर हो जाएं।
जीवन चलता रहेगा दोस्तों, वक्त कहाँ ठहरता है,
हर रंग कुछ कहता है,,,,
हर रंग कुछ कहता है,,,,
मौलिक रचना
अजय पटनायक
तमनार, छत्तीसगढ़
बहुत सुंदर रचना सर जी, हर रंग कुछ कहता है
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