Tuesday, March 2, 2021

रीता चटर्जी की रचना- पलाश

रचनाकार - श्रीमती रीता चटर्जी
जिला - कोरिया ( छत्तीसगढ़)
विषय - पलाश
शीर्षक - पलाश प्रकृति की शोभा


नव यौवन आया मौसम में
कभी छाया भाए कभी धूप,
हर्षित हुआ मन अनायास
देख पलाश से अनुपम रुप।
  प्रकृति की शोभा निराली
  कर देते मन हर्षित,
  कानन - कानन हुए मुग्ध
  हुआ धरती अति शोभित।
रंगों से सराबोर करने
लाते संदेशा कुसुम पलाश
रंग इसके इतने गहरे 
छूटे न करें भरसक प्रयास।
पिता मन होते बावरा
निहार कर इसकी छवि
लिख डाली पात पति को
रंग दे मुझे अब न छूटे कभी।
    टूट पेड़ से फूल पलाश
    घीस कर बने मिलन रंग
    वसंत के आगमन में दोबारा
      मिलाने आती बिछड़े को संग
रीता चटर्जी

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