Tuesday, March 2, 2021

शैलेन्द्र चेलक की रचना- अंतर्मन की ज्वाला

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
विषय - पलास
शीर्षक - अंतर्मन की ज्वाला 

   अंतर्मन की ज्वाला
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नई कोपलें पेड़ो पर ,
नव निर्माण सिरजाता है ,
पलास फूलों की लालिमा ,
फागुन में इठलाता है ,
वसुंधरा के आँचल में ,
मुखरित हुई लताएँ ,
सुरभित वन - उपवन में ,
कोयल , मिलन के गीत सुनाएं ,
बौर से लदे आम की डाली ,
पीली  सरसों , अलसी मतवाली ,
कलियों पर देखो बार- बार ,
गुंजन करते , रस चूसते आली ,
मन उद्विग्न हो जाता है ,
विरह में नीर बरसते हैं ,
प्रिय प्यासी चकवा ज्यों -
चाँद की चाह तरसतें हैं ,
प्रकृति यूं लगे जब ,
कोई मदमाता हो प्याला ,
लो चली देखो बसन्ती बयार ,
पतझड़ के आलम में ,
दहकते फूलों की कतार ,
ठूठ सी बेजान विरहनी की ,
मानो अंतर्मन की ज्वाला ,

            - - शैलेन्द्र चेलक  - -

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